top of page

स्वागत है आपका ख़ुशी कंप्यूटर के लर्निंग सेण्टर 

कंप्यूटर से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ 

कम्प्यूटर क्या है?

कम्प्यूटर की परिभाषा क्या है?

कम्प्यूटर का पूरा नाम क्या है?

कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर का परिचय

कम्प्यूटर की विशेषताएं

कम्प्यूटर की सीमाएं

कम्प्यूटर का इतिहास

कम्प्यूटर फील्ड में करियर

कम्प्यूटर क्या है?

IMG20211220184646.jpg

        Computer का नाम सुनते ही मन में सैंकडो‌ विचार आने लगते है. क्योंकि Computer सैंकडो‌ गतिविधियां अकेला कर सकता है. हाँ, सैंकडो! आपने सही पढा‌ और वो भी एक साथ. Computer को शब्दो मे बांधना थोडा सा मुश्किल होता हैं. ऐसा इसलिए है कि हर इंसान Computer का उपयोग अलग‌-अलग कार्यों के लिए करता है.  कम्प्यूटर के बारे में एक आम धारणा भी प्रचलित है कि Computer एक अंग्रेजी शब्द है. Computer का हिंदी में मतलब (Computer Meaning in Hindi) “गणना” होता है. इसका मतलब कम्प्यूटर एक गणकयंत्र (Calculator) है. लेकिन, कम्प्यूटर को एक जोडने वाली मशीन कहना गलत होगा. क्योंकि कम्प्यूटर जोडने के अलावा सैकडों अलग-अलग कार्य करता है.

        अगर आप एक लेखक/टाइपिस्ट से पूछोगे कि कम्प्यूटर क्या है? तो वह शायद कहे की कम्प्युटर एक टाइप मशीन हैं. इसी तरह हम एक गेम खेलने वाले बालक से पूछे तो वह शायद कहे कि कम्प्यूटर तो एक गेम मशीन है. कम्प्यूटर ऑपरेटर से पूछोगे तो वह इसे ऑफिस का काम निपटाने वाली मशीन के संदर्भ में परिभाषित करने की कोशिश करेगा.

       इसलिए हम कह सकते है कि Computer को किसी एक अर्थ में नही बांधा जा सकता है. कम्प्यूटर का मतलब उसके उपयोग के आधार पर हर व्यक्ति के लिए अलग है. कम्प्यूटर के इतने अर्थ होने के बावजूद हमने आपके लिए कम्प्यूटर को परिभाषित करने कि एक कोशिश की है. इस कम्प्यूटर की परीभाषा को आप कम्प्यूटर की एक प्रमाणित परिभाषा नही मान सकते है. क्योंकि कार्य के आधार पर कम्प्यूटर के अर्थ भी बदल जाते है.

कम्प्यूटर की परिभाषा क्या है?

     “Computer एक मशीन है जो कुछ तय निर्देशों के अनुसार कार्य को संपादित करते है. और ज्यादा कहे तो Computer एक इलेक्ट्रोनिक उपकरण है जो इनपुट उपकरणों की मदद से आँकडों को स्वीकार करता है उन्हें प्रोसेस करता है और उन आँकडों को आउटपुट उपकरणों की मदद से  सूचना के रूप में प्रदान करता है.”

      इस परिभाषा के स्पष्ट है कि कम्प्यूटर युजर द्वारा पहले कुछ निर्देश लेता है जो विभिन्न इनपुट डिवाइसों की मदद से प्रविष्ट कराए जाते है. फिर उन निर्देशों को प्रोसेस किया जाता है, और आखिर में निर्देशों के आधार पर परिणाम देता है जिसे आउटपुट डिवाइसों की मदद से प्रदर्शित करता है.

      निर्देशों में कई प्रकार का डेटा शामिल होता है. जैसे; संख्या, वर्णमाला, आंकड़े आदि. इस डेटा के अनुसार ही कम्प्यूटर परिणाम बनाता है. यदि कम्प्यूटर को गलत आंकड़े दिए जाते है तो कम्प्यूटर भी गलत ही परिणाम देता है. मतलब साफ है कि कम्प्यूटर GIGO – Garbage in Garbage Out के नियम पर काम करता है.

कम्प्यूटर का पूरा नाम क्या है?

    कम्प्यूटर बहु-उपयोगी मशीन होने के कारण आज तक भी इसको एक परिभाषा में नही बाँध पाँए है. इसी कड़ी में कम्प्यूटर का पूरा नाम भी चर्चित रहता है. जिसकी अलग लोगों और संस्थाओं ने अपने अनुभव के आधार पर भिन्न-भिन्न व्याख्या की है. लेकिन, इनमे से कोई भी Standard Full Form नही है. मैंने आपके लिए एक कम्प्यूटर की फुल फॉर्म नीचे बताई है. जो काफी लोकप्रिय और अर्थपूर्ण है.

C – Commonly
O – Operating
M – Machine
P – Particularly
U – Used in
T – Technology
E – Education and
R – Research

अर्थात Commonly Operating Machine Particularly Used in Technology Education and Research.

इनपुट डिवाईस क्या है 

   Computer अपना कार्य अपने आप नही कर सकता हैं. कम्प्युटर से कार्य करवाया जाता हैं. जिसके लिए उसे आवश्यक निर्देश और डाटा देना पडता हैं. डाटा और निर्देश पहुँचाने के लिए खास उपकरणों को सहारा लिया जाता हैं. जिन्हे हम Input Device कहते हैं. इस Lesson में हम आपको कम्प्युटर के प्रमुख इनपुट डिवाइसों के नाम और उनकी पूरी जानकारी दे रहे हैं. ये उपकरण सबसे ज्यादा इस्तेमाल और प्रचलित इनपुट डिवाइस हैं. इसलिए हमने इस Lesson के लिए इनका चुनाव किया हैं. इनके अलावा भी और भी इनपुट डिवाइस उपलब्ध हैं.

 

Keyboard

   Keyboard एक इनपुट डिवाइस हैं, जिसकी सहायता से हम कम्प्युटर को निर्देश और डाटा देते हैं. की-बोर्ड का उपयोग मुख्य रूप से Text लिखने के लिए किया जाता हैं. मगर,कुछ Special Functions और Commands भी की-बोर्ड द्वारा दी जाती हैं. Keyboard की बनावट एक Typewriter की तरह होती हैं. जिसमे 100 से भी अधिक Keys होती हैं. Keyboard Keys को Function Keys, Typing Keys, Control Keys, Navigation Keys और Numeric Keys में बांटा जाता है.

 

Mouse

   Mouse एक खास मगर आम इनपुट डिवाइस हैं. जिसे Pointing Device भी कहा जाता हैं. माउस का उपयोग मुख्यत: Computer Screen पर Items को चुनने, सरकाने, उनकी तरफ जाने, उन्हे खोलने और बंद करने के लिए किया जाता हैं. कम्प्युटर माउस भी आमतौर पर वास्तविक माउस की तरह ही नजर आता हैं. यह छोटा और आयताकार होता है, जो एक केबल के द्वारा कम्प्युटर से जुडा रहता हैं. लेकिन, आजकल तो Wireless Mouse भी बाजार में आ गए हैं.

 

Touch Screen

   Touch Screen भी एक इनपुट डिवाइस होता हैं. क्या आप जानते थे? यह की-बोर्ड और माउस दोनों का कार्य अकेली कर देती हैं. यह उंगली या Stylus से Touch करने पर Event Register करती हैं और उसे Processing के लिए कम्प्युटर को भेजती हैं. Touch Screen पर Navigation के लिए Icons और Text का सहारा लिया जाता हैं.

 

Joy Stick

  Joy Stick भी कुछ-कुछ माउस की तरह का इनपुट डिवाइस होता हैं. जिसका उपयोग Cursor या Pointer को नियत्रिंत करने के लिए किया जाता हैं. इसका उपयोग Computer Games और Graphic Designing में अधिक किया जाता हैं.

Joy Stick की बनावट Gear की जैसी होती हैं. जिसमें एक गोल या वर्गाकार Base होता हैं जिसमें Lever या छ्डी लगी रहती हैं. इस छडी को हिलाकर Cursor/Pointer को नियत्रिंत किया जाता हैं. आजकल Joy Sticks में बटन भी आते हैं जिन्हे Triggers कहा जाता हैं.

 

Light Pen

   Light Pen एक Pointing Input Device है. जिसका इस्तेमाल Text को Select करने, Picture Draw करने के लिए किया जाता हैं. इसकी बनावट एक Ball Pen के जैसी होती हैं. Light Pen को Touch Screen का जन्म दाता भी माना जाता है.

 

Track Ball

   Track Ball एक इनपुट डिवाइस हैं जिसका इस्तेमाल Pointer को नियत्रिंत करने के लिए किया जाता हैं. इसके Base में एक आधी धंसी हुई Ball होती हैं. जिसे हिलाने पर Pointer हलचल करता हैं. Track Ball में भी बटन होते हैं जो माउस बतन की तरह क्लिक का काम करते हैं.

 

Scanner

   Scanner एक Photocopy मशीन की तरह होती हैं और काम करती हैं. मगर इसका परिणाम विपरित होता हैं. Scanner की मदद से हम Hard Copy यानि कागज पर उपलब्ध डाटा को कम्प्युटर में पहुँचाते हैं. जिसे Use करने से पहले Edit भी कर सकते है और Print भी ले सकते हैं

 

Webcam

   Webcam जिसका पूरा नाम Web Camera होता हैं. एक छोटा Digital Camera होता हैं. जो सीधे कम्प्युटर से जुडा रहता हैं. जो सॉफ्टवेयर की मदद से Control किया जाता हैं. इसका उपयोग Video Calling करने, Video Record करने, तस्वीर खींचने के लिए किया जाता हैं.

आजकल Laptop में तो Webcam Built In होता हैं. मगर कम्प्युटर के लिए इसे अलग से खरीदना पडता है. और Smart Phones में इसे Front Facing Camera आसान शब्दों में कहें तो Selfie Camera के नाम से जाना जाता हैं.

 

Digital Camera

   Digital Camera का उपयोग तस्वीरों और विडियों को कम्प्युटर में पहुँचाने के लिए किया जाता हैं. फिर इन तस्वीरों और विडियों को Graphic Editor द्वारा Manipulate किया जाता हैं. और फिर User इन्हे Print कर सकता है.

 

Microphone

  Microphone का इस्तेमाल Sound Input देने के लिए किया जाता हैं. इसकी सयायता Voice Chat, Calling करते समय आवाज पहुँचाई जा सकती हैं. और Presentations, Videos के लिए Sound Record की जा सकती हैं.

 

Graphic Tablet

   Graphic Tablet को Digitizer भी कहा जाता हैं. जिसका उपयोग Computer Screen पर लिखने के लिए किया जाता हैं. यह इनपुट उपकरण Graphics और Pictorial Data को Binary Input में बदलता हैं. E-learning में इसका बहुत इस्तेमाल होता हैं.

 

MICR

  MICR का पूरा नाम Magnet Ink Character Reader होता हैं. MICR का सबसे ज्यादा इस्तेमाल Financial Sector में किया जाता हैं. इस उपकरण की मदद से ये बैंकिग संस्थाएं Checques Processing के लिए करती हैं. Checque पर Bank Code और Cheque Number एक विशेष स्याही से छपा रहता हैं. जिसमे मशीन के पढने योग्य Magnetic Partical मिले रहते हैं. ये मशीन Checques पर मुद्रित डाटा को पढती हैं और उसे कम्प्युटर में भेज देती हैं. यह कार्य बहुत तेजी से किया जाता हैं.

 

OCR

   OCR का पूरा नाम Optical Character Reader होता हैं. इसका उपयोग मुद्रित (Printed), टंकित (Typed) और हस्तलिखित (Hand Written) Text को Machine-Encoded Text में बदलने के लिए किया जाता हैं. Data Entry जैसे कामों के लिए OCR सबसे ज्यादा कारगार मशीन हैं.

 

Bar Code Reader

    Bar Code Reader का इस्तेमाल वस्तुओं पर मुद्रित Bar Coded Data को पढने के लिए किया जाता हैं. इसकी सहायता से वस्तुओं की गिनती, छंटनी आसानी से हो जाती हैं. यह एक Scanner की तरह कार्य करता हैं. जो डाटा को पढता हैं और उसे कम्प्युटर में भेज देता हैं.

 

OMR

   OMR का पूरा नाम Optical Mark Reader होता हैं. जो पेन या पेंसिल के Marks को Scan करता हैं. इसका उपयोग Answer Sheets को Check करने के लिए किया जाता हैं. जिन्हे OMR Sheet कहा जाता है. इसके द्वारा बहुचयनात्मक प्रशनों को जांचा जाता हैं

 

 

आउटपुट डिवाईस क्या है 

   कम्प्युटर Input Devices से निर्देश और डाटा लेकर उसे Process करने के बाद परिणाम देता हैं. इस परिणाम को दिखाने के लिए उसे कुछ खास उपकरणों की जरूरत पडती हैं. जिन्हे Output Devices कहते हैं. इस Lesson में हम आपको Computer के Output Devices की पूरी जानकारी देंगे. हमने यहाँ प्रमुख आउटपुट डिवाइसों को चुना हैं. जो सबसे ज्यादा प्रचलित और उपयोग में लिए जाते हैं. क्योंकि परिणाम के अनुसार आउटपुट उपकरण भी बदल सकता हैं.

 

Monitor

  Monitor जिसे, VDT – Video Display Terminal और VDU – Video Display Unit, भी कहते हैं. कम्प्युटर का मुख्य Output Device है. जिसका इस्तेमाल Computer Output Display करने के लिए करता हैं. ये आउटपुट Video, Text, Images कुछ भी होत सकता है. Monitor किसी आउटपुट को दिखाने के लिए Pixels का इस्तेमाल करता हैं. जितने ज्यादा Pixels होंगे Object भी उतना ही साफ होगा. Pixels को आप एक Dot मान सकते हैं. Monitor की बनावट आपकी TV के जैसी होती हैं. जिसमें Screen, Button, Power Supply, Case आदि चीजें होती हैं. इन मॉनिटर को इनकी Manufacturing Technology के आधार पर दो वर्गों में बांटा जाता हैं.

 

  • CRT Monitor

  • FPD Monitor

 

1. CRT Monitor

   CRT का पूरा नाम Cathode-Ray Tube होता हैं. CRT एक Electron Beam होती हैं. जो स्क्रीन पर घूमती हैं. इसे आम भाषा में Pixel कहा जाता हैं. Screen पर जितने ज्यादा CRT होंगे Object उतना ही Quality का दिखाई देता हैं.

एक CRT Monitor आपकी पूरानी TV के जैसा होता हैं. जो बहुत वजनी भी होता हैं. और बिजली भी अधिक खपत करता हैं. ये मॉनिटर अधिकतर तीसरी और चौथी पीढि के कम्प्युटरों में इस्तेमाल होते थे.

 

2. FPD Monitor

   FPD का पूरा नाम Flat-Panel Display होता हैं. जो एक पतली स्क्रीन होती हैं. जिसे आप दीवार पर टांग सकते हैं, हाथ में पहन सकते हैं. यह बहुत हल्कि , छोटी और मजबूत होती हैं. इनका इस्तेमाल आप Calculators, Digital Clocks, Laptop Dispaly, Smartphone Screen आदि में होता हैं.

FPD को आप दीवार पर टंगी TV के समान मान सकते हैं. जिसे आप LCD – Liquid Crystal Device और LED – Light Emitting Diodes के नाम से भी जानते हैं. आजकल कम्प्युटरों में LCD और LED Monitors का ही उपयोग किया जाता हैं.

 

Speaker

  Speaker एक आउटपुट डिवाइस हैं जिसका इस्तेमाल कम्प्युटर Sound Output देने के लिए करता हैं. आप जो गाने सुनते हैं. फिल्मों के डायलॉग सुनते हैं. वह सब Speaker के द्वारा ही सुनाई पडता हैं. कम्प्युटर Sound Results को Speaker के माध्यम से ही बताता हैं.

 

Printer

   Printer एक अन्य महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस हैं. जिसका उपयोग Computer में Stored Digital Data को कागज पर मुद्रित किया जाता हैं. जब डाटा कागज पर छ्प जाता हैं तो इसे Hard Copy कहते हैं. और कम्प्युटर में रहने पर इसे Soft Copy कहा जाता हैं. हम कम्प्युटर में उपलब्ध डाटा को कई प्रकार और Quality में छाप सकते हैं. इसके लिए हमे अलग-अलग प्रकार के Printers की जरूरत पडती हैं. जिनके नाम नीचे दिये जा रहे हैं.

 

  • Dot Matrix Printer

  • Drum Printer

  • Line Printer

  • Laser Printer

  • Inkjet Printer

  • 3D Printer

 

Projector

   Projector एक आउटपुट डिवाइस हैं जिसका उपयोग Computer Images, Videos, Texts या अन्य Items को दीवार या फिर किसी दूसरी समतल स्थल पर दिखाने के लिए करता हैं. यह इस काम के लिए एक रोशनी दीवार पर भेजता हैं जिसे Project करना कहते हैं. इसलिए इस डिवाइस को Projector कहा जाता हैं. Projector एक मॉनिटर का कार्य ही करता हैं जो आउटपुट को किसी दुसरी चीज पर दिखाता हैं. Business Meetings, Class Room Teaching, Public Shows, Theatres आदि में इसका उपयोग बहुत किया जाता हैं. Projector का आउटपुट वास्तविक Size से बडा, समतल और ज्यादा रंगीन होता होता है.

 

Headphone

   Headphone भी Sound Output के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं. लेकिन इसके द्वारा आप Sound Input भी कम्प्युटर को दे सकते हैं. इसके द्वारा आप अपनी खुद की आवाज Record कर सकते हैं. इसलिए इसे Input Device भी कहा जाता हैं.

 

 

CPU क्या होता है 

   कम्प्यूटर को अपना काम करने के लिए विभिन्न अलग-अलग उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है. यह अपना काम अकेला नही कर सकता है. क्योंकि, कम्प्यूटर किसी अकेली मशीन का नाम नहीं है. यह तो बहुत सारे डिवाइसों से मिलकर बने एक डिवाइसों का समूह का नाम है. इन्ही महत्वपूर्ण उपकरणों में एक और परिचित नाम शामिल है जिसका नाम है – CPU. जिसका नाम एक साधारण कम्प्यूटर यूजर भी जानता है. अब आपके मन में सवाल आ सकते है कि ये CPU क्या होता है? CPU कैसे काम करता है? और CPU के पार्ट्स क्या-क्या होते है? तो चिंता मत कीजिए आज इन्ही सवालों का जवाब आपको मिलने वाला है. क्योंकि इस लेख को इन्ही जवाबों को देने के लिए तैयार किया गया है.

 

 

CPU क्या है – What is CPU in Hindi?

   CPU कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण भाग है जिसे प्रोसेसर, माइक्रोप्रोसेसर और केवल सीपीयू भी कहते है. सीपीयू कम्प्यूटर से जुड़े सभी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, यूजर्स तथा इनपुट डिवाइसों से प्राप्त डेटा एवं निर्देशों को संभालता है, और उसे प्रोसेस करके परिणाम देता है. ऑपरेटिंग सिस्टम एवं अन्य प्रोग्रामों का संचालन भी करता है. यह कम्प्यूटर का दिमाग है.

कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं. इनके बारे में आप अधिक जानकारी कम्प्यूटर के प्रकार Lesson से ले सकते है.

  • अनुप्रयोग (Application)

  • उद्देशय (Purpose)

  • आकार (Size)

Types of Computer based on Work

 

1. Ana log Computer

   Ana log Computer एक ऐसी मशीन है जो आँकड़ों की एक भौतिक मात्रा (दाब, तापमान, लम्बाई, ऊँचाई आदि) को दर्शाता है, यह आँकड़े सतत (लगातार) परिवर्तित होते रहते है. इस कम्प्यूटर की कार्यक्षमता तेज होती है. इनका परिणाम हमें ग्राफ आदि के रूप में प्राप्त होता है. Ana log Computer आँकड़े स्टोर नही कर सकता है. इनका उपयोग तकनीक, विज्ञान, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किया जाता है.

थर्मामीटर एक एनालॉग कम्प्यूटर हैं.

 

2. Digital Computer

   यह कम्प्यूटर एनालॉग कम्प्यूटर से भिन्न होता है. एक Computer जो सूचनाओं को अंकीय रूप में प्रोसेस करता है उसे डिजिटल कम्प्यूटर कहा जात है. डिजिटल कम्प्यूटर सूचनाओं को अंकीय रूप में दर्शाने के लिए Binary System (0,1) का इस्तेमाल करता है. ये Computer गणीतिय तथा तार्किक कार्य करने में सक्षम होता है. जैसे, एक Calculator. ये एनालॉग कम्प्यूटर से कुछ धीमें लेकिन परिणाम में अधिक शुद्ध होते है. Digital Computer सूचनाओं को स्टोर कर सकते है. एक डिजिटल कम्प्यूटर गिनता है और एनालॉग कम्प्यूटर मापता है.

 

3. Hybrid Computer

    ये कम्प्यूटर एक एनालॉग कम्प्यूटर तथा एक डिजिटल कम्प्यूटर की विशेषताए लिए होते है. Hybrid Computer इन दोनो तरह के कम्प्यूटर से अधिक तेज और परिणाम शुद्ध होते है. इन कम्प्यूटरों में डिजिटल कम्प्यूटर एक नियत्रंक तथा अंकिय कार्य करने के लिए होता है. वहीं, एनालॉग कम्प्यूटर समस्या का हल करते है. इनका उपयोग जटिल गणीतिय समीकरण, वैज्ञानिक गणनाए तथा रक्षा आदि के क्षेत्रों में किया जाता है. Petrol Pump Machine, Speedometer आदि Hybrid Computer के आसान उदाहरण हैं.

  1.  

  2. आकार के आधार पर कम्प्यूटर प्रकार

    •      Micro Computer

    •      Mini Computer

    •      Mainframe Computer

    •      Supercomputer

Types of Computer based on size

 

1. Micro Computer

    Micro Computer तेजी से बढ़ता हुआ तथा व्यापक रूप में इस्तेमाल होने वाला कम्प्यूटर है. यह सभी तरह के कम्प्यूटर से सस्ता एवं हल्का होता है. और आकार में भी सबसे छोटा होता है.

इस प्रकार के कम्प्यूटर को सामान्य उद्देश्य जैसे, मनोरंजन, शिक्षा, घर तथा कार्यालय इस्तेमाल आदि के लिए विकसित किया गया है. PCs, Notebooks, Laptops, PDAs (Personal Digital Assistants) आदि Micro Computer है.

 

2. Mini Computer

    Mini Computers को ‘Mid-range Computer’ भी कहा जाता है. इनका इस्तेमाल छोटे व्यवसाय तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा किया जाता है. मिनि कम्प्यूटर को Single User के लिए विकसित नही किया जाता है. इनको एक कम्पनी के द्वारा अपने एक विभाग विशेष मे किसी कार्य विशेष को करने में उपयोग लिया जाता है.

 

3. Mainframe Computer

     एक Mainframe Computer ऊपर वर्णित सभी कम्प्यूटर से अधिक तेज तथा क्षमतावान होता है. इनका इस्तेमाल सरकारी प्रतिष्ठानों, बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा आँकड़ों को संग्रहित करने के लिए किया जाता है. ये कम्प्यूटर आकार में बहुत बडे होते है.

 

5. Super Computer

    Super Computer मानव द्वारा निर्मित अब तक का सबसे तेज और शक्तिशाली कम्प्यूटर है. ये कम्प्यूटर आकार में बहुत विशाल एवं खर्चीले होते है. इनका उपयोग बड़े संगठनो द्वारा शोध कार्य, मौसम भविष्यवाणी, तकनीक आदि कार्यों में होता है. Summit Super Computer अब तक का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर हैं. जिसे अमेरीका में बनाया गया था. भारत ने अपना पहला सुपर कम्प्यूटर PARAM – 8000 सन 1991 में बनाया था. परम कम्प्यूटर को भारत सरकार की एक संस्था C-DAC ने विकसित किया था. परम के बाद भारत में बहुत सारे सुपर कम्प्यूटर बन चुके हैं. और कई तो Top 500 Super Computers में भी शामिल हैं. भारत का सबसे तेज सुपर कम्प्युटर Pratyush and Mihir हैं.

कम्प्यूटर का परिचय

     Computer अपना कार्य अकेला नही कर सकता है. Computer किसी कार्य को करने के लिए कई तरह के उपकरणों तथा प्रोग्राम की सहायता लेता है. Computer के ये उपकरण और प्रोग्राम क्रमश: ‘Hardware तथा Software ‘ के नाम से जाने जाते है. Computer के इन उपकरणों तथा प्रोग्राम के बारे में आप अगले Lessons में जान पाएंगे. एक आम Computer कुछ इस प्रकार दिखाई देता है.

कम्प्युटर के विभिन्न उपकरण

 

     ऊपर जो Computer आप देख रहे है इसे ‘डेस्कटॉप Computer‘ कहते है. वर्तमान समय में इसी प्रकार के Computer अधिक प्रचलित है. इस फोटो में आपको कई अलग-अलग उपकरण दिख रहे होंगे ये सभी मिलकर Computer मशीन को बनाते है. आइए इन उपकरणों के बारे में संक्षिप्त में जानते है

1. System Unit

System Unit एक बक्सा होता है जिसमें Computer को अपना कार्य करने के लिए आवश्यक यंत्र लगे होते है. सिस्टम युनिट को CPU (Central Processing Unit) भी कहा जाता है. इसमें मदरबोर्ड, प्रोसेसर, हार्ड डिस्क आदि यंत्र होते है जो Computer को कार्य करने लायक बनाते है. इसे Computer Case भी कहते है.

 

2. Monitor

Monitor एक आउटपुट उपकरण है जो हमें दिए गए निर्देशों के परिणामों को दिखाता है. यह बिल्कुल टीवी के जैसा होता है. वर्तमान में मॉनिटरो की जगह एल सी डी एवं एल ई डी ने ले ली है.

 

3. Keyboard

Keyboard एक इनपुट उपकरण है जो हमें Computer को निर्देश देने के लिए होता है. इसकी मदद से ही Computer को वांछित आंकडे एवं निर्देश दिए जाते है. इसमे विभिन्न प्रकार की कुंजिया (keys) होती है इन्ही के द्वारा आंकडे एवं निर्देश Computer तक पहुंचाए जाते है. आप यहाँ से Keyboard का उपयोग  करना सीख सकते है.

 

4. Mouse

Mouse भी एक इनपुट उपकरण है जो Computer को निर्देश देने के लिए होता है. हम इसके द्वारा Computer में उपलब्ध प्रोग्राम को चुनते है. आप यहाँ से Mouse का उपयोग  करना सीख सकते है.

 

5. Speakers

Speakers आउटपुट उपकरण है जो हमें Computer से आवाज को सुनने में मदद करते है. इन्ही के द्वारा हमें गानों, फिल्मों, प्रोग्रामों तथा खेलों आदि में उपलब्ध ध्वनी सुनाई देती है.

 

6. Printer

Printer भी एक आउटपुट उपकरण है जो Computer द्वारा विश्लेषित सूचनाओं को कागज पर प्राप्त करने के लिए होता है. कागज पर प्राप्त होने वाली सूचनाओं को ‘हार्डकॉपी‘ भी कहते है. और इसके उलट जो सूचनाए Computer में ही रक्षित रहती है उन्हे ‘सॉफ्टकॉपी’ कहते है.

 

कम्प्यूटर की विशेषताएं

    कम्प्यूटर ने हम इंसानों द्वारा किए जाने वाले अधिकतर कामों पर कब्जा कर लिया हैं और इंसान को उसकी क्षमता से अधिक कार्य-क्षमता प्रदान की हैं. यह सब इस मशीन के खास गुणों के कारण संभव हैं. तभी हम इंसान कम्प्यूटर को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं. कम्प्यूटर की कुछ खास विशेषताएँ निम्न हैं.

1. गति – Speed

  कम्प्यूटर बहुत तेज गति से कार्य करता हैं.

  यह लाखों निर्देशों को केवल एक सैकण्ड में ही संसाधित कर सकता हैं.

  इसकी डाटा संसाधित करने की गति को माइक्रोसैकण्ड (10–6), नैनोसैकण्ड (10-9) तथा पिकोसैकण्ड (10-12) में मापा जाता हैं.

  आमतौर पर प्रोसेसर की एक युनिट की गति दसियों लाख निर्देश प्रति सैकण्ड यानि MIPS (Millions of Instructions Per Second)

  इस मशीन का निर्माण ही तीव्र गति से कार्य करने के लिए किया गया हैं.

 

2. शुद्धता – Accuracy

   कम्प्यूटर GIGO (Garbage in Garbage Out) सिद्धांत पर कार्य करता हैं.

   इसके द्वारा उत्पादित परिणाम त्रुटिहीन रहते हैं. अगर किसी परिणाम में कोई त्रुटि आती हैं तो वह इंसानी हस्तक्षेप तथा प्रविष्ट निर्देशों के आधार पर होती हैं.

   इसके परिणामों की शुद्धता मानव परिणामों की तुलना में बहुत ज्यादा होती हैं.

 

3. परिश्रमी – Diligence

  कम्प्यूटर एक थकान मुक्त और मेहनती मशीन हैं.

  यह बिना रुके, थके और बोरियत माने बगैर अपना कार्य सुचारु रूप से समान शुद्धता के साथ कर सकता हैं.

  यह पहले और आखिरी निर्देश को समान एकाग्रता, ध्यान, मेहनत और शुद्धता से पूरा करता हैं.

 

4. बहुप्रतिभा – Versatility

  कम्प्यूटर एक बहु-उद्देश्य मशीन हैं.

  यह गणना करने के अलावा अनेक उपयोगी कार्य करने में सक्षम होता हैं.

  इसके द्वारा हम टाइपिंग, दस्तावेज, रिपोर्ट, ग्राफिक, विडियों, ईमेल आदि सभी जरूरी काम कर सकते

 

5. स्वचालित – Automation

  यह एक स्वचालित मशीन भी हैं.

  यह बहुत सारे कार्यों को बिना इंसानी हस्तक्षेप के पूरा कर सकता हैं.

  स्वचालितता इसकी बहुत बडी खूबी हैं.

 

6. संप्रेषण – Communication

  एक कम्प्यूटर मशीन अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों से भी बात-चीत कर सकता हैं.

  यह नेटवर्क के जरीए अपना डाटा का आदान-प्रदान एक-दूसरे को आसानी से कर सकते हैं.

 

7. भंडारण क्षमता – Storage Capacity

  कम्प्यूटर में बहुत विशाल मेमोरी होती हैं.

  कम्प्यूटर मेमोरी में उत्पादित परिणाम, प्राप्त निर्देश, डाटा, सूचना अन्य सभी प्रकार के डाटा को विभिन्न रूपों में संचित किया जा सकता हैं.

  भंडारन क्षमता के कारण कम्प्यूटर कार्य की दोहराव से बच जाता हैं.

 

8. विश्वसनीय – Reliability

  यह एक भरोसेमंद और विश्वसनीय मशीन हैं.

  इसका जीवन लंबा होता हैं.

  इसके सहायक उपकरणों को आसानी से पलटा और रख-रखाव किया जा सकता हैं.

 

9. प्रकृति का दोस्त – Nature Friendly

  कम्प्यूटर अपना कार्य करने के लिए कागज का इस्तेमाल नहीं करता हैं.

  डाटा का भंडारण करने के लिए भी कागजी दस्तावेज नहीं बनाने पडते हैं.

  इसलिए कम्प्यूटर अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति के रक्षक होते हैं. और इससे लागत में भी कमी आती हैं.

  कम्प्यूटर की सीमाएं – Limitations of Computer in Hindi

  कम्प्यूटर एक मशीन हैं जिसे अपना कार्य करने के लिए हम इंसानों पर निर्भर रहना पडता हैं. जब तक इसमे निर्द्श प्रविष्ट नहीं होंगे यह कोई परिणाम उत्पादित नहीं   

  कर सकता हैं.

 

     इसमें विवेक नहीं होता हैं. यह बुद्धिहीन मशीन हैं. इसमें सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती हैं. मगर वर्तमान समय में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) के द्वारा कम्प्यूटरों को सोचने और तर्क करने योग्य क्षमता विकसित की जा रही हैं.

इसे काम करने के लिए साफ-सुथरे वातारण की जरुरत पडती हैं. क्योंकि धूल-भरी जगह पर इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती हैं. और यह कार्य करना बंद भी कर सकता हैं.

कम्प्यूटर की सीमाएं

  1. कम्प्यूटर एक मशीन हैं जिसे अपना कार्य करने के लिए हम इंसानों पर निर्भर रहना पडता हैं. जब तक इसमे निर्द्श प्रविष्ट नहीं होंगे यह कोई परिणाम उत्पादित नहीं कर सकता हैं.

  2. इसमें विवेक नहीं होता हैं. यह बुद्धिहीन मशीन हैं. इसमें सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती हैं. मगर वर्तमान समय में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) के द्वारा कम्प्यूटरों को सोचने और तर्क करने योग्य क्षमता विकसित की जा रही हैं.

इसे काम करने के लिए साफ-सुथरे वातारण की जरुरत पडती हैं. क्योंकि धूल-भरी जगह पर इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती हैं. और यह कार्य करना बंद भी कर सकता हैं.

कम्प्यूटर फील्ड में करियर

 

Computer Generation 

 

First Generation of Computer (1946-1954)

 

   इस पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल कम्प्यूटर में मुख्य घटक के रूप में हुआ | मशीन भाषा/निम्न स्तरीय भाषा/बाइनरी भाषा (0,1) कम्प्यूटर की भाषा के रूप में इस्तेमाल हुयी | इस पीढ़ी के कम्प्यूटर अकार में बड़े और वजन में भरी होते थे | 

Example-

  1. ENIAC (Electronic Numerical Integration and Calculator)

  2. UNIVAC (Universal Variable Automatic Computer)

  3. EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer)

  4. IBM -650(International Business Machine)

  5. IBM -701

 

Second Generation of Computer (1955-1963)    

 

   इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में वैक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांज़िस्टर्स का इस्तेमाल किया गया | फोर्टरन, ऐल्गॉल और कोबोल आदि उच्च स्तरीय भाषाओं का प्रयोग किया गया | प्राइमरी स्टोरेज के लिए मेग्नेटिक कोर और सेकेंडरी स्टोरेज के लिए मेग्नेटिक टेप का इस्तेमाल हुआ | इनपुट देने के लिए पंच कार्ड और आउटपुट के लिए प्रिंटर का इस्तेमाल हुआ | 

Example-

  1. IBM 1620

  2. IMB 1794

  3. CDC 1604 (Control Data Corporation)

  4. CDC 3600

  5. UNIVAC 1108

 

Third Generation of Computer (1964-1974)

   इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में आई. सी. चिप्स का इस्तेमाल किया गया |  फोर्टरन, ऐल्गॉल, कोबोल और बेसिक आदि उच्च स्तरीय भाषाओं का प्रयोग किया गया | प्राइमरी स्टोरेज के लिए मेग्नेटिक कोर और सेकेंडरी स्टोरेज के लिए मेग्नेटिक डिस्क का इस्तेमाल हुआ | 

Example –

  1. IBM 360

  2. IBM 370/168

  3. Honeywell – 6000 series

  4. PDP (Personal Data Processor)

  5. TDC – 316 (Torpedo Data Computer)

 

Fourth Generation of Computer (1975 – Till date)

   इस पीढ़ी में एल. एस. आई. और वी. एल. एस. आई. मुख्य घटक के रूप में इस्तेमाल हुयी | जिसे माइक्रोप्रोसेसर और सी पी यू  के नाम से भी जानते है | डॉस और विण्डोज डेवलपमेंट का कार्य शुरू हो गया था | ग्राफिकल आधारित सिस्टम होने लगा | C, C++, Java, Java Script, Visual Basic और python आदि उच्च स्तरीय भाषाओ का प्रयोग होने लगा |

Example –

  1. IBM 4341

  2. DEC 10 (Digital Equipment Corporation)

  3. Star – 10000

  4. PDP -11 (Personal Data Processor)

  5. CRAY -1 (Super Computer)

  6. CRAY – X – MP (Super Computer)

 

 Fifth Generation of Computer (1980 to Till Date)

   यू.एल. एस. आई. का इस्तेमाल मुख्य घटक के रूप में हुआ | कृत्रिम वुद्धि का प्रयोग कम्प्यूटर  में किया जाने लगा | C, C++, Java, Java Script, Visual Basic और python आदि उच्च स्तरीय भाषाओ का प्रयोग होने लगा | 

Example –

  1. Desktop

  2. Laptop

  3. Notebook

  4. Ultra Book

  5. Robots

 

कम्प्यूटर का इतिहास

History of Computer

आधुनिक कम्प्यूटर इतिहास की देन हैं. जिसकी शुरुआत ईसा पूर्व ही हो चुकी थी. जब चीनियों ने अबेकस का आविष्कार किया. इसके बाद विभिन्न प्रकार के स्वचालित मशीने अस्तित्व में आई. और चार्ल्स बैबेज द्वारा बनाया गया स्वाचालित इंजन आज के कम्प्यूटर का आधार बना. कम्प्यूटर का इतिहास कुछ इसी तरह के उतार-चढावों से भरा हुआ है. जिसके बारे में संक्षेप में नीचे बताया गया हैं.

  •  

  •    Abacus दुनिया का पहला गणना यंत्र था जिसके द्वारा सामान्य गणना (जोडना, घटाना) की जा सकती थी. अबेकस का आविष्कार लगभग 2500 वर्ष पूर्व (इसका सही-सही समय ज्ञात नहीं हैं) चीनीयों द्वारा किया गया. यह यंत्र 17वीं शताब्दी तक गनना करने का एक मात्र उपकरण बना रहा.

  •       1017 में John Napier ने अपनी किताब “Rabdology” में अपने गणितीय उपकरण का जिक्र किया. जिसका नाम “Napier’s Bones” था. इस डिवाइस का उपयोग उत्पादों की गणना तथा भागफल ज्ञात करने के लिए किया जाता था. इस डिवाइस में गणना करने के लिए इस्तेमाल होने वाली विधि को ‘रेब्दोलॉजी’ कहा जाता था. इस डिवाइस द्वारा जोडना, घटाना, गुणा, भाग भी किये जा सकते थे.

  •   John Napier के आविष्कार के कुछ साल बाद (1620 के आसपास) ही माननीय William Oughtred ने “Slide Rule” का आविष्कार कर लिया.

  • इसके द्वारा गुणा, भाग, वर्गमूल, त्रिकोणमीतिय जैसी गणनाएं की जा सकती थी. मगर जोड तथा घटाव के लिए कम इस्तेमाल किया हुआ.

  •  

  •     1642 में माथ 18 वर्ष की अल्पायु में फ्रेंच वैज्ञानिक और दार्शनिक ने पहला व्यवहरिक यांत्रिक कैलकुलेटर बनाया.

  • इस कैलकुलेटर का नाम “पास्कालिन” था. जिसके द्वारा गणना की जा सकति थी.

  • फिर 1671 में पास्कालिन में सुधार करते हुए एक एडवांस मशीन ‘Step Reckoner’ का आविष्कार हुआ. जो जोडने, घटाने के अलावा गुणा, भाग, वर्गमूल भी कर सकती थी. Gottfried Wilhelm Leibniz द्वारा विकसित इस मशीन में भंडारण क्षमता भी थी.

  •  

  •     Binary System भी इन्ही के द्वारा विकसित किया गया. जिसे एक अंग्रेज ‘George Boole’ ने आधार बनाकर 1845 में एक नई गणितीय शाखा “Boolean Algebra” का आविष्कार किया.  आधुनिक कम्प्यूटर डाटा संसाधित करने और तार्किक कार्यों के लिए इसी बाइनरी सिस्टम और बुलीन अल्जेब्रा पर ही निर्भर रहते हैं.

  •  

  •     1804 में फ्रेंच के एक बुनकर ‘Joseph-Marie-Jacquard’ ने एक हथकरघा बनाया. जिसका नाम ‘Jacquard Loom’ था. इसे पहला ‘सूचना-संसाधित’ डिवाइस माना जाता हैं. और इस डिवाइस के आविष्कार ने साबित कर दिया कि मशीनों को मशीनि कोड द्वारा संचालित किया जा सकता था. 1820 में फ्रांस के ‘Thomas de Colmar’ ने “Arithmometer” नामक एक नई गणना मशीन बनाई. जिसके द्वारा गणित के चार बुनियादी कार्य जोडना, घटाना, गुणा, भाग किये जा सकते थे. मगर द्वितीय विश्व युद्ध के कारण इस मशीन का विकास रुक गया. आधुनिक कम्प्यूटर के पितामह माननीय ‘Charles Babbage’ ने 1822 में “बहुपदीय फलन” का सारणीकरण करने के लिए एक स्वचालित यांत्रिक कैलकुलेटर का आविष्कार किया. इस कैलकुलेटर का नाम “Difference Engine” था.   यह भाप द्वारा चलती थी और इसका आकार बहुत विशाल था.

  •  

  • इसमे प्रोग्राम को स्टोर करने, गणना करने तथा मुद्रित करने की क्षमता थी.  इस इंजन के लगभग एक दशक बाद 1833 में “Analytical Engine” डिजाइन किया. इस इंजन को ही आधुनिक कम्प्यूटर का शुरुआती प्रारुप माना जाता हैं. इसलिए ही “चार्ल्स बैबेज” को कम्प्यूटर का जनक कहा जाता हैं. इस मशीन मे वे सभी चीजे थी जो मॉडर्न कम्प्यूटर में होती है.

  •  

  •     Analytical Engine में Mill (CPU), Store (Memory), Reader and Printer (Input/Output) का काम कर रहे थे. अब आधुनिक कम्प्यूटर की नींव रखी जा चुकी थी. इसके बाद कम्प्यूटर ने तेजी से विकास किया. और नई-नई तकनीकों का आविष्कार किया गया. जिसके कारण कम्प्यूटर विशाल कमरे से बाहर निकलकर हमारे हाथ में समा गया. इस विकास क्रम को पीढीयों में बांटा गया है. जिसक वर्णन इस प्रकार हैं.

******

कार्य चल रहा है

कुछ ही समय में सब ठीक हो जायेगा  

आपके असुविधा के लिए हमें खेंद है 

​धन्यवाद 

bottom of page